एलपीजी आपूर्ति, मण्डी शुल्क, बिजली व्यवस्था व लंबित प्रोत्साहन दावों पर उठाए मुद्दे, शीघ्र समाधान का मिला आश्वासन
काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने प्रदेश के उद्योगों की प्रमुख समस्याओं के समाधान को लेकर शुक्रवार को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री कार्यालय, देहरादून में मुलाकात की। इस दौरान विभिन्न औद्योगिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पवन अग्रवाल ने बताया कि मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे प्रदेश के उद्योगों की उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उन्होंने उद्योगों के लिए एलपीजी की नियमित एवं पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि उत्पादन प्रक्रिया बाधित न हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि आधारित उद्योग उच्च मण्डी शुल्क और 2.5 प्रतिशत विकास उपकर के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 1.5 प्रतिशत है और किसानों से सीधी खरीद पर भी छूट मिलती है। इसके अलावा, कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता कम होने से अन्य राज्यों से मंगाने पर लागत बढ़ जाती है। द्वितीय आवक पर पुनः मण्डी शुल्क लगाए जाने से उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अग्रवाल ने मांग की कि मण्डी शुल्क व विकास उपकर की दरें उत्तर प्रदेश के अनुरूप की जाएं, किसानों से सीधी खरीद पर छूट दी जाए तथा द्वितीय आवक पर शुल्क समाप्त किया जाए, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
उन्होंने विद्युत आपूर्ति की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई। कहा कि बार-बार ब्रेकडाउन, ट्रिपिंग, पावर कट, लो वोल्टेज और सब-स्टेशनों की अपर्याप्त क्षमता के कारण उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने संपूर्ण विद्युत प्रणाली का सर्वे कराकर समयबद्ध रखरखाव और आधुनिकीकरण की मांग की।।साथ ही, स्मार्ट मीटर लगने के बाद गलत और अत्यधिक बिजली बिल आने की समस्या भी उठाई गई। उन्होंने इस पर शासन स्तर से त्वरित कार्रवाई की जरूरत बताई।।पवन अग्रवाल ने श्रम विभाग द्वारा ‘बिल्डिंग एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम, 1996’ के तहत जारी नोटिसों को भी अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यह उपकर केवल निर्माण लागत पर लागू होता है और उत्पादन शुरू होने के बाद उद्योग इसके दायरे से बाहर हो जाते हैं। ऐसे में इन नोटिसों को निरस्त किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत प्रोत्साहन दावों के लंबित होने का मुद्दा भी उठाया गया। उन्होंने कहा कि 11 अप्रैल 2025 के बाद राज्य स्तरीय प्राधिकृत समिति की बैठक न होने से दावे लंबित हैं, जिन्हें शीघ्र निस्तारित किया जाना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्योगों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।



