रिनेसां कॉलेज में हिमालयन सस्टैनेबिलिटी चैंपियनशिप के तहत पारंपरिक व्यंजन महोत्सव आयोजित

उत्तराखंड की लोक संस्कृति, स्वाद और विरासत से रूबरू हुए विद्यार्थी, बच्चों ने स्वयं बनाकर प्रस्तुत किए पारंपरिक व्यंजन

रामनगर (कशीपुर वार्ता)। रिनेसां कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट, ग्राम बसई, पीरूमदारा में बुधवार को हिमालयन सस्टैनेबिलिटी चैंपियनशिप कार्यक्रम के अंतर्गत पारंपरिक व्यंजन महोत्सव का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह महोत्सव नेचर साइंस इनिशिएटिव द्वारा रॉयल एनफील्ड के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की रसोई में पीढ़ियों से संजोए गए पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय खाद्य सामग्री और व्यंजन विधियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों से आए युवा विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता एवं दादा-दादी के साथ भाग लेकर पारिवारिक परंपराओं से जुड़े व्यंजन तैयार किए और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किए। प्रतिभागी बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़े पारंपरिक व्यंजन स्वयं बनाकर प्रस्तुत किए, जो स्वाद, पोषण और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहे। इन व्यंजनों में उत्तराखंड की मिट्टी, जलवायु और लोकजीवन की झलक साफ दिखाई दी।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए 23 विद्यार्थियों को चयन प्रक्रिया के बाद अंतिम चरण के लिए साझा मंच पर आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने अपने व्यंजनों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया, जिसमें शेफ आशीष सेमवाल, राजेश भट्ट एवं अनीता आनंद शामिल रहे। निर्णायकों ने व्यंजनों का मूल्यांकन केवल स्वाद के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी पौष्टिकता, भौगोलिक महत्व और पारंपरिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए किया। निर्णायकों ने कहा कि पारंपरिक भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी, जलवायु और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। जब बच्चे इन व्यंजनों को सीखते और बनाते हैं, तो वे केवल विधि नहीं सीखते, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने की कला भी सीखते हैं। कॉलेज के प्रबंध निदेशक आलोक गुसाईं और निदेशक कुणाल मदान ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि संस्कृति को बचाने के सबसे प्रभावी माध्यमों में भाषा और व्यंजनों का संरक्षण प्रमुख है। उन्होंने कहा कि बच्चों का यह प्रयास आतिथ्य क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। नेचर साइंस इनिशिएटिव की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सौम्या प्रसाद ने बताया कि युवाओं को प्रकृति, परंपरा और स्थायी जीवनशैली से जोड़ने के लिए इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी जारी रहेंगे। यह महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध खाद्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।

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