सहोता मल्टी स्पेशलिटी  हॉस्पिटल में “नेशनल एनआरपी डे” का सफल आयोजन

नवजात शिशुओं की सुरक्षित देखभाल को मजबूत बनाने को स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। राष्ट्रीय नवजात शिशु विज्ञान मंच (एनएनएफ) भारत के “प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान-2026” के अंतर्गत रविवार को सहोता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, काशीपुर में आज रविवार को  “नेशनल एनआरपी डे” का सफल आयोजन किया गया। देशव्यापी स्तर पर आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य बेसिक नवजात पुनर्जीवन कार्यक्रम (एनआरपी) के माध्यम से नवजात शिशुओं की सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण देखभाल को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। यह कार्यक्रम भारत सरकार, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) तथा फॉग्सी के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम को एनएनएफ इंडिया के कोर्स संख्या-479 के रूप में संचालित किया गया। आयोजन में एनएनएफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लालन के भारती, राष्ट्रीय चेयरपर्सन डॉ. एस. निम्बालकर, सचिव डॉ. अमित उपाध्याय तथा आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. रवि सहोता ने कहा कि जन्म के समय नवजात शिशुओं को कई बार आपात परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में समय पर और सही तरीके से दी गई नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण हजारों शिशुओं का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि “वन डे, वन नेशन, वन मिशन” की थीम के साथ चलाया जा रहा यह अभियान पूरे देश में नवजात सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य करेगा। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों, बाल रोग विशेषज्ञों, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को बेसिक एनआरपी की महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने जन्म के समय उत्पन्न होने वाली नवजात आपात स्थितियों के प्रभावी प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल : डॉ. रवि सहोता

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। सहोता हॉस्पिटल में आयोजित “नेशनल एनआरपी डे” कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ एवं आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने कहा कि नवजात शिशुओं की सुरक्षित देखभाल आज स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड में नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. सहोता ने कहा कि जन्म के समय कई नवजात शिशुओं को सांस लेने एवं अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, ऐसे में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समय पर किया गया नवजात पुनर्जीवन (एनआरपी) शिशु के जीवन को बचाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक एवं प्रभावी तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे नवजात आपात स्थितियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य नवजात मृत्यु दर को कम करना तथा प्रत्येक शिशु को सुरक्षित जीवन प्रदान करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी, जनहितकारी एवं स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाला प्रयास बताया।

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