
प्रेम, संस्कार और कृतज्ञता की अनुपम मिसाल; पुलवामा शहीदों को भी दी श्रद्धांजलि
काशीपुर। शहर के प्रतिष्ठित मास्टर इंटरनेशनल स्कूल में मातृ-पितृ पूजन दिवस हर्षोल्लास, गरिमा और भावनात्मक वातावरण के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर प्रेम, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की अनुपम अनुभूति से सराबोर दिखाई दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में माता-पिता के प्रति आदर, कृतज्ञता और संस्कारों की भावना विकसित करना था, ताकि वे आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय परंपराओं से भी जुड़े रहें। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आशीष बिल्डर्स एंड डेवलपर्स की डायरेक्टर नूपुर गुप्ता उपस्थित रहीं।

विद्यालय परिवार ने उनका पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। अपने संबोधन में नूपुर गुप्ता ने कहा कि माता-पिता का सम्मान भारतीय संस्कृति की सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है। ऐसे आयोजन बच्चों को जीवनभर याद रहने वाले संस्कार प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यालय के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार देना ही किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से सजे आकर्षक मंच से हुई। विद्यार्थियों ने मधुर संगीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद बच्चों ने पारंपरिक विधि से अपने माता-पिता का तिलक कर, पुष्प अर्पित कर तथा चरण स्पर्श कर पूजन किया। यह दृश्य अत्यंत भावुक था और पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी।

अभिभावकों की आंखों में गर्व और प्रसन्नता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। विद्यालय की प्रबंधिका शिल्पी गर्ग ने कहा कि मातृ-पितृ पूजन दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे आयोजन बच्चों को परिवार के महत्व का एहसास कराते हैं और उनमें संस्कारों का विकास करते हैं। प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग ने 14 फरवरी के अवसर पर पुलवामा में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2019 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हुए हमले में अनेक वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने विद्यार्थियों को देशभक्ति की भावना अपनाने, शहीदों के त्याग का सम्मान करने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। सकारात्मक ऊर्जा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया तथा यह संदेश दे गया कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि संस्कारों का सशक्त माध्यम भी है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. गौरव गर्ग ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।
पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि, राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान

काशीपुर। कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2019 के पुलवामा में शहीद हुए वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्ररक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को नमन किया। इस अवसर पर पूरे वातावरण में देशभक्ति और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी। प्रधानाचार्य गौरव गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि हमें अपने सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और समर्पण को सदैव स्मरण रखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि मातृ-पितृ सम्मान के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध भी उतना ही आवश्यक है। परिवार हमें संस्कार देता है और राष्ट्र हमें पहचान। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को जिम्मेदार, संवेदनशील और देशभक्त नागरिक बनाने की दिशा में सार्थक पहल हैं। विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे अपने कर्तव्यों को समझें, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करें तथा देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम ने सभी के मन में राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रबल कर दिया।
माता-पिता के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और संस्कार विकसित करने का संदेश

काशीपुर। मातृ-पितृ पूजन दिवस का आयोजन विद्यार्थियों में माता-पिता के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण की भावना जागृत करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि जीवन की हर उपलब्धि के पीछे माता-पिता का त्याग, परिश्रम और आशीर्वाद निहित होता है। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसमें संस्कारों का समावेश हो। केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं की समझ भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। मातृ-पितृ पूजन जैसे आयोजनों से बच्चों में संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और परिवार के प्रति कृतज्ञता का भाव विकसित होता है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता का तिलक कर आशीर्वाद लिया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। इस भावनात्मक वातावरण ने सभी को परिवार के महत्व और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से जोड़ दिया। विद्यालय प्रबंधिका शिल्पी गर्ग ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं तथा समाज में पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यार्थियों द्वारा पारंपरिक विधि से किया मातृ-पितृ पूजन

काशीपुर। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब आया, जब विद्यार्थियों ने पारंपरिक विधि से अपने माता-पिता का तिलक कर चरण स्पर्श किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान पूरा परिसर श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की भावनाओं से ओत-प्रोत दिखाई दिया। बच्चों की आंखों में प्रेम और आभार झलक रहा था, वहीं अभिभावक भी इस आत्मीय क्षण से भावुक हो उठे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गीतों और नृत्य के माध्यम से अपने माता-पिता के प्रति आभार और सम्मान प्रकट किया। प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भारतीय पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं की गरिमा का स्मरण कराया। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवार की महत्ता और संस्कारों के संरक्षण का सशक्त संदेश है। ऐसे अवसर बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं। कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश होता है, तभी समाज में सुदृढ़ और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण संभव है।
