केवीआर हॉस्पिटल में “नेशनल एनआरपी डे” के तहत स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

नवजात शिशुओं की जीवनरक्षक तकनीकों की दी गई जानकारी, मृत्यु दर कम करने पर जोर

काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। केवीआर हॉस्पिटल, काशीपुर में 10 मई रविवार को “एनएनएफ नेशनल एनआरपी डे-2026” के अंतर्गत स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाना तथा जन्म के तुरंत बाद आवश्यक जीवनरक्षक सहायता सुनिश्चित करना रहा। आयोजन के दौरान डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात पुनर्जीवन (नियोनेटल रिससिटेशन) की आधुनिक एवं आपातकालीन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान केवीआर हॉस्पिटल के शिशु रोग विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. कुशाल अग्रवाल ने कहा कि नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनएफ) इंडिया के तत्वावधान में पूरे देश में “एनआरपी डे” मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभियान की थीम “एक दिन, एक मिशन, एक राष्ट्र” रखी गई है, जिसका उद्देश्य नवजात शिशुओं की सुरक्षित देखभाल के प्रति स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाना है।

नवजात आपात स्थितियों से निपटने की दी गई ट्रेनिंग

काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। केवीआर हॉस्पिटल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों को जन्म के तुरंत बाद उत्पन्न होने वाली आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तकनीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में नवजात शिशु को सांस लेने में कठिनाई होने, हृदय गति सामान्य न रहने तथा अन्य आपात परिस्थितियों में तुरंत जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने के तरीकों का अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नवजात शिशुओं की सुरक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद आवश्यक हैं।

देशभर में एक साथ चलाया जा रहा राष्ट्रीय अभियान: डॉ. कुशाल अग्रवाल

कशीपुर (कशीपुर वार्ता)। केवीआर हॉस्पिटल ने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कुशाल अग्रवाल ने बताया कि इस राष्ट्रीय अभियान के तहत पूरे भारत में एक ही दिन में 1,050 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें 20 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों, दो हजार से अधिक प्रमाणित प्रशिक्षकों तथा 310 से अधिक जिलों की भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान नवजात शिशुओं के जीवन को बचाने के लिए प्रशिक्षित हाथों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास है।

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