65 साल बाद टूटी भारतीय एथलेटिक्स की सबसे बड़ी दीवार

विशाल टी.के. ने 44.98 सेकंड में 400 मीटर दौड़ पूरी कर रचा इतिहास

काशीपुर/ रांची (काशीपुर वार्ता)। भारतीय एथलेटिक्स में 400 मीटर दौड़ की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बाधा आखिरकार टूट गई।
तमिलनाडु के धावक विशाल टीके ने रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में 23 मई 2026 को आयोजित फेडरेशन कप में पुरुषों की 400 मीटर रेस मात्र 44.98 सेकंड में पूरी कर एक ऐतिहासिक नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 1960 रोम ओलंपिक में मिल्खा सिंह द्वारा बनाए गए 45.73 सेकंड के रिकॉर्ड के बाद पहली बार कोई भारतीय धावक 45 सेकंड के जादुई आंकड़े से नीचे पहुंचा है। करीब 65 वर्षों बाद मिली इस उपलब्धि को भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 400 मीटर दौड़ केवल गति की नहीं, बल्कि शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक नियंत्रण और वैज्ञानिक तैयारी की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। दौड़ के अंतिम चरण में शरीर ऑक्सीजन की भारी कमी, लैक्टिक एसिड और मांसपेशियों की तीव्र थकान से गुजरता है। ऐसे में विश्व स्तरीय खिलाड़ी अपनी तकनीक और गति को बनाए रखने में सफल रहते हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत लंबे समय तक आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, बायोमैकेनिक्स, रिकवरी साइंस और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से पीछे रहा। इसी कारण भारतीय धावकों को विश्व स्तर तक पहुंचने में दशकों का समय लगा। अब विशाल टी.के. की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सही वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और मानसिक मजबूती के साथ भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं। 400 मीटर का मौजूदा विश्व रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के वेड वान नीकेर्क के नाम 43.03 सेकंड है। विशेषज्ञों के अनुसार विश्व स्तरीय धावकों और भारतीय खिलाड़ियों के बीच सबसे बड़ा अंतर अंतिम 100 मीटर में गति बनाए रखने की क्षमता में दिखाई देता है। वैश्विक स्तर के खिलाड़ी पूरे रेस के दौरान अपनी गति और शरीर की तकनीक को संतुलित रखते हैं, जबकि भारतीय धावकों में लंबे समय तक अंतिम चरण में गति टूटने की समस्या देखी गई। विशाल टी.के. की यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए “मिशन 44” की शुरुआत मानी जा रही है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत को लगातार विश्व स्तर के धावक तैयार करने हैं तो स्कूल स्तर से ही प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पोषण, रिकवरी और आधुनिक खेल तकनीक से जोड़ना होगा। विशाल टी.के. ने न केवल एक रिकॉर्ड तोड़ा है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स में नई उम्मीद और नए युग का संदेश भी दिया है।

वैज्ञानिक प्रशिक्षण अपनाए बिना विश्व स्तर पर सफलता नामुमकिन: डॉ. रवि सहोता

मिल्खा सिंह के बाद पहली बार कोई भारतीय पहुंचा 45 सेकंड से नीचे

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। इंडियन एसोसिएशन (आईएपी) उत्तराखंड के अध्यक्ष एवं स्पोर्ट्स साइंस विशेषज्ञ डॉ. रवि सहोता ने कहा कि विशाल टी.के. की उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई दिशा का संकेत है। मिल्खा सिंह के बाद पहली बार कोई भारतीय पहुंचा 45 सेकंड से नीचे पहुंचा उन्होंने कहा कि भारत को 45 सेकंड की बाधा तोड़ने में 65 वर्ष इसलिए लगे क्योंकि वर्षों तक खेल प्रशिक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी रही। केवल अधिक अभ्यास के बजाय अब खेल विज्ञान, बायोमैकेनिक्स, पोषण, रिकवरी और मानसिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। डॉ. रवि सहोता ने कहा कि विश्व स्तरीय खिलाड़ी बचपन से वैज्ञानिक पद्धति से तैयार किए जाते हैं। 10 से 14 वर्ष की आयु प्रतिभा विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवधि होती है, इसलिए स्कूल स्तर पर ही बायोमैकेनिस्ट, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट और आधुनिक प्रदर्शन विश्लेषण प्रणाली को शामिल करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को लगातार विश्व स्तर के धावक तैयार करने हैं तो पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर आधुनिक खेल विज्ञान को अपनाना ही होगा।

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