27वीं कारगिल विजय वर्षगांठ पर सैनिकों को किया सम्मानित, देशभक्ति कार्यक्रमों से वीर शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर शनिवार को एक ओंकार ग्लोबल अकेडमी में भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम आयोजित कर देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के भूतपूर्व सैनिकों को सम्मानित कर उनके साहस, शौर्य और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को सलाम किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, कविताओं एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों के माध्यम से कारगिल युद्ध के वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को जीवंत किया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया तथा पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया। विद्यालय के चेयरमैन सुखविंदर सिंह, चेयरपर्सन नवनीत कौर एवं प्रधानाचार्य जॉनसन ने सभी भूतपूर्व सैनिकों एवं अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र के उन अमर वीरों के त्याग, साहस और अद्वितीय समर्पण का स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी पर्व है, जिनकी बदौलत भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सैनिकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों के रूप में ज्ञानार्थी कॉलेज के चेयरमैन संतोष मेहरोत्रा, अकेडमिक डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भूतपूर्व सैनिकों के योगदान की सराहना की और युवाओं से देशभक्ति, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
कारगिल के वीरों का साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अमर स्रोत : सुखविंदर सिंह
कशीपुर (कशीपुर वार्ता)। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एक ओंकार ग्लोबल अकेडमी के चेयरमैन सुखविंदर सिंह ने कहा कि 26 जुलाई केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान का गौरवपूर्ण प्रतीक है। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर भारतीय सेना ने अद्वितीय पराक्रम का परिचय देकर विश्व को यह संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए हर चुनौती का डटकर सामना करना जानता है। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान देशवासियों पर सदैव एक नैतिक दायित्व बनकर रहेगा। हमें अपने वीर जवानों के त्याग का सम्मान करते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए। विद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में देशभक्ति, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा-भाव जैसे संस्कार विकसित करें। उन्होंने सभी से कारगिल के अमर वीरों को नमन करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।








