आयुर्वेदिक पंचकर्म से आमवात रोग में मिली राहत, घुटनों के दर्द और सूजन से उबरी भारती चमोली


  • आयुर्वेद चिकित्सा से आमवात (इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस) पर विजय
  • नई टिहरी आयुर्वेदिक चिकित्सालय में बालुका स्वेद और पत्र पोटली स्वेद उपचार से स्वास्थ्य में हुआ उल्लेखनीय सुधार

टिहरी : जिला अस्पताल बौराड़ी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में उपचार प्राप्त कर रही भारती चमोली को लंबे समय से परेशान कर रहे सूजनयुक्त गठिया (इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस/आमवात) रोग में आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं पंचकर्म उपचार के माध्यम से उल्लेखनीय राहत मिली है। कई वर्षों से घुटनों के असहनीय दर्द, सूजन और अकड़न से जूझ रही भारती चमोली के स्वास्थ्य में उपचार के बाद सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियां पहले की अपेक्षा काफी सहज हो गई हैं।

भारती चमोली लंबे समय से दोनों घुटनों में तीव्र दर्द, सूजन एवं जकड़न की समस्या से परेशान थीं। चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और सामान्य कार्य करने में भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समस्या बढ़ने पर उन्होंने जिला अस्पताल बौराड़ी, नई टिहरी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में परामर्श लिया, जहां जांच एवं चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सिद्धि मिश्रा ने उन्हें इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस (आमवात) से ग्रसित पाया।

डॉ. सिद्धि मिश्रा ने बताया कि इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं जोड़ों के स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित करने लगती है। इसके कारण जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और लालिमा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं तथा समय पर उपचार न मिलने पर जोड़ों को स्थायी क्षति भी पहुंच सकती है।

चिकित्सालय में भारती चमोली का समग्र आयुर्वेदिक उपचार प्रारंभ किया गया, जिसमें औषधीय उपचार के साथ पंचकर्म चिकित्सा की विशेष विधियों को शामिल किया गया। उपचार के प्रथम चरण में सात दिनों तक बालुका स्वेद कराया गया। इस प्रक्रिया में सेंधा नमक मिश्रित गर्म रेत की पोटली से प्रभावित जोड़ों की सिकाई की गई, जिससे सूजन, भारीपन और दर्द में कमी आने लगी।

इसके बाद दस दिनों तक पत्र पोटली स्वेद उपचार दिया गया। इस उपचार में निर्गुंडी, अरंडी और सहजन जैसी औषधीय पत्तियों को विशेष औषधीय तेलों के साथ तैयार कर पोटली बनाई गई तथा प्रभावित जोड़ों पर स्वेदन एवं मालिश की गई। उपचार के दौरान घुटनों की सूजन में उल्लेखनीय कमी आई और दर्द नियंत्रित होने के साथ जोड़ों की गतिशीलता में भी सुधार हुआ।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस एक ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों के स्वस्थ ऊतकों पर आक्रमण करने लगती है। इसके परिणामस्वरूप जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न एवं लालिमा उत्पन्न होती है, जो समय रहते उपचार न मिलने पर जोड़ों को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती है।

आयुर्वेदिक चिकित्सालय में भारती चमोली का समग्र एवं व्यवस्थित उपचार प्रारम्भ किया गया। उपचार में आयुर्वेदिक औषधियों के साथ-साथ पंचकर्म चिकित्सा की विशेष विधियों को शामिल किया गया। पंचकर्म सहायक द्वारा निर्धारित अवधि तक बालुका स्वेद एवं पत्र पोटली स्वेद उपचार प्रदान किया गया।

बालुका स्वेद (7 दिवस)

उपचार के प्रथम चरण में 7 दिनों तक बालुका स्वेद किया गया। इस प्रक्रिया में साफ एवं महीन रेत को सेंधा नमक के साथ गर्म कर सूती कपड़े की पोटली बनाई गई। इस सूखी सिकाई से जोड़ों में मौजूद सूजन, भारीपन एवं जकड़न में कमी आई तथा दर्द में राहत मिलने लगी।

पत्र पोटली स्वेद (10 दिवस)

इसके पश्चात 10 दिनों तक पत्र पोटली स्वेद उपचार किया गया। इसमें निर्गुंडी, अरंडी एवं सहजन जैसी औषधीय पत्तियों को विशेष औषधीय तेलों के साथ तैयार कर पोटली बनाई गई। प्रभावित जोड़ों पर इस पोटली से स्वेदन एवं मालिश करने से सूजन में उल्लेखनीय कमी आई, दर्द नियंत्रित हुआ तथा घुटनों की गतिशीलता में सुधार होने लगा।

उपचार की निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद भारती चमोली की स्थिति में स्पष्ट सुधार देखा गया। घुटनों की सूजन में कमी आई, दर्द में काफी राहत मिली तथा घुटनों को मोड़ने एवं चलने-फिरने में पहले की अपेक्षा अधिक सहजता अनुभव हुई। इससे उनकी दैनिक गतिविधियों में भी सकारात्मक परिवर्तन आया और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई।

उपचार की अवधि पूर्ण होने के बाद भारती चमोली की स्थिति में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया। घुटनों की सूजन कम हुई, दर्द में राहत मिली तथा चलने-फिरने और घुटनों को मोड़ने में पहले की तुलना में अधिक सहजता महसूस हुई। इससे उनकी दैनिक जीवनचर्या और जीवन गुणवत्ता में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है।

भारती चमोली ने आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नई टिहरी की सेवाओं के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नियमित उपचार, चिकित्सकों के मार्गदर्शन और पंचकर्म चिकित्सा के कारण उन्हें लंबे समय से चली आ रही समस्या से काफी राहत मिली है।

डॉ. सिद्धि मिश्रा ने कहा कि उचित चिकित्सकीय परामर्श, नियमित आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से आमवात (इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस) जैसे रोगों में प्रभावी लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से जोड़ों के दर्द, सूजन एवं अकड़न जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करने तथा समय रहते आयुर्वेदिक चिकित्सालय में परामर्श लेने की अपील की।

 



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