दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे हारी दिव्यांगता, अनुराग ने नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में रचा इतिहास


गोपेश्वर (चमोली)। कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी बाधा इंसान का रास्ता नहीं रोक सकती। इस कहावत को पौड़ी जनपद के दिव्यांग युवक अनुराग रावत ने एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है। सेरेब्रल पाल्सी जैसी चुनौतीपूर्ण दिव्यांगता से जूझ रहे अनुराग ने नीती घाटी में आयोजित नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में 10 किलोमीटर की दौड़ महज 1 घंटा 45 मिनट में पूरी कर अपनी अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय दिया।

समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित नीती घाटी में आयोजित इस अल्ट्रा रन में प्रतिभागियों को कठिन पहाड़ी रास्तों, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण मौसम का सामना करना पड़ा। लेकिन इन सभी कठिनाइयों के बावजूद अनुराग ने न केवल दौड़ पूरी की, बल्कि यह साबित कर दिया कि मजबूत संकल्प और सकारात्मक सोच के आगे शारीरिक सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।

दौड़ के दौरान अनुराग का आत्मविश्वास और संघर्षशीलता अन्य प्रतिभागियों तथा दर्शकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी रही। उनकी इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता को परिभाषित नहीं करती, बल्कि उसकी सोच और मेहनत ही उसकी असली पहचान बनती है।

अनुराग रावत इससे पहले भी विभिन्न प्रतियोगिताओं और आयोजनों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। उनका कहना है कि सीमाएं केवल हमारे मन में होती हैं। यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण और संकल्प मजबूत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में अनुराग का प्रदर्शन केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से संघर्ष कर आगे बढ़ने की प्रेरक कहानी बन गया है। उनकी सफलता उन सभी लोगों के लिए एक संदेश है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं। अनुराग रावत की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने के साथ ही समाज में दिव्यांगजनों की क्षमताओं और संभावनाओं के प्रति सकारात्मक सोच को भी मजबूत करती है। उनके जज्बे ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।फोटो 01जीओपी2 नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन का जांबाज अनुराग रावत।

 



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