विज्ञान, शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए मिला सम्मान, गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति में हुआ भव्य समारोह
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय पं. किशोरी लाल गुड़िया की 125वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज, काशीपुर के सभागार में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। गुड़िया परिवार द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में देश के प्रख्यात वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद् डॉ. अनिल कुमार सक्सेना को विज्ञान, अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।।समारोह में भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी महाराज की विशेष उपस्थिति रही, जबकि उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता कर स्वतंत्रता सेनानी पं. किशोरी लाल गुड़िया के राष्ट्रसेवा के योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई), लखनऊ रह चुके डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने विज्ञान एवं औषधीय अनुसंधान के क्षेत्र में पाँच दशकों से अधिक समय तक उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान की हैं। विशेष रूप से क्वांटिटेटिव स्ट्रक्चर-एक्टिविटी रिलेशनशिप (QSAR) तथा कंप्यूटर एडेड ड्रग डिज़ाइन (CADD) के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान और सराहना मिली है। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. सक्सेना की उपलब्धियां विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। उनका सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का गौरव है, बल्कि कृष्णा पब्लिक कॉलेजिएट, काशीपुर परिवार के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी उपलब्धियां विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और नवाचार, उत्कृष्टता तथा शोध-आधारित शिक्षा की भावना को सशक्त बनाती हैं।
युवा पीढ़ी विज्ञान और राष्ट्रसेवा को जीवन का लक्ष्य बनाए : डॉ. अनिल कुमार सक्सेना

काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। स्वतंत्रता सेनानी पं. किशोरी लाल गुड़िया की 125वीं जयंती पर सम्मानित किए जाने के उपरांत प्रख्यात वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद् डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गौरव के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी को विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
डॉ. सक्सेना ने कहा कि शोध, नवाचार और ज्ञान ही विकसित भारत की आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु सोच विकसित करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा समाजहित में अपने ज्ञान का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देना है।




