“सीपीआर सीखें, जीवन बचाएँ — सीपीआर-तैयार भारत बनाएँ” के संकल्प के साथ राज्यभर में सात प्रशिक्षण शिविर आयोजित
काशीपुर कशीपुर वार्ता। भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन के नेतृत्व में देशभर में संचालित “संजीवनी: सीपीआर मास अवेयरनेस प्रोग्राम” के अंतर्गत मंगलवार को पूरे भारत में एक साथ सीपीआर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य प्रत्येक परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल और समुदाय को सीपीआर-जागरूक एवं सीपीआर-तैयार बनाना है, ताकि अचानक हृदय गति रुकने (सडन कार्डियक अरेस्ट) जैसी आपात स्थिति में आम नागरिक भी समय रहते प्रभावी सहायता देकर अनमोल जीवन बचा सकें। इसी कड़ी में आईएपी उत्तराखंड ने राज्यभर में सात प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 485 प्रतिभागियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर जीवनरक्षक तकनीकों को सीखा। यह अभियान राष्ट्रीय संयोजक डॉ. लोकेश तिवारी, राष्ट्रीय सचिव डॉ. रुचिरा गुप्ता, आईएपी उत्तराखंड अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता, राज्य समन्वयक डॉ. मान सिंह तथा आईएपी उत्तराखंड सचिव डॉ. राकेश कुमार के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभियान को सफल बनाने में डॉ. विशाल कौशिक, डॉ. हंस वैष सहित अनेक सीपीआर प्रशिक्षकों एवं आईएपी सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यह संदेश भी दिया गया कि “सीपीआर केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि आपातकाल में किसी को नया जीवन देने का सबसे प्रभावी माध्यम है।”
समय पर दिया गया सीपीआर बचा सकता है हजारों अनमोल जीवन: डॉ. रवि सहोता
कशीपुर कशीपुर वार्ता। आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने कहा कि अचानक हृदय गति रुकने (सडन कार्डियक अरेस्ट) की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए सबसे निर्णायक होते हैं। यदि आम नागरिक सही समय पर और सही तकनीक से सीपीआर देना सीख जाएँ, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में अस्पताल पहुंचने से पहले दिया गया सीपीआर जीवन और मृत्यु के बीच का महत्वपूर्ण अंतर साबित हो सकता है। डॉ. सहोता ने बताया कि आईएपी उत्तराखंड का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक नागरिक को सीपीआर के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित बनाना है, ताकि हर परिवार, विद्यालय, संस्थान और समुदाय आपदा की घड़ी में जीवनरक्षक भूमिका निभा सके। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से सीपीआर प्रशिक्षण प्राप्त कर सुरक्षित, जागरूक और संवेदनशील समाज के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।






