लखनऊ, हल्द्वानी और नगीना से आई प्रतिभागियों ने भी लिया हिस्सा, प्रसिद्ध नृत्यांगना हंसवी टोंक ने दी विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित कर रहा जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल, काशीपुर एक बार फिर शहर और आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रतिभा निखारने का सशक्त मंच बनकर उभरा। विद्यालय में आयोजित दो दिवसीय भारतीय शास्त्रीय नृत्य कार्यशाला का दूसरा एवं अंतिम दिन उत्साह, ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। कार्यशाला में जीडी गोयनका काशीपुर की छात्राओं के अलावा लखनऊ, हल्द्वानी और नगीना से आई छात्राओं, शिक्षिकाओं तथा अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। देश की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना हंसवी टोंक ने प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों से परिचित कराया और उन्हें नृत्य के तकनीकी एवं भावात्मक पक्षों का गहन प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बेसिक डांस मुद्राएं, हस्त मुद्राएं, चेहरे के भाव, अभिव्यक्ति की कला तथा लयबद्ध गतिविधियों का अभ्यास कराया गया। हंसवी टोंक ने नृत्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को अभिव्यक्त करने वाली एक सशक्त कला बताते हुए छात्राओं को उसकी गहराई से अवगत कराया।
छात्राओं ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ कार्यशाला में भाग लेते हुए शास्त्रीय नृत्य से जुड़े सांस्कृतिक महत्व, अनुशासन और सौंदर्यबोध को समझा। इस प्रशिक्षण ने न केवल उनकी कलात्मक प्रतिभा को निखारा, बल्कि आत्मविश्वास और मंचीय प्रस्तुति क्षमता को भी मजबूत किया। प्रतिभागियों ने इसे एक प्रेरणादायक और यादगार अनुभव बताया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने प्रतिभागियों की लगन, अनुशासन और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल काशीपुर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिससे न केवल विद्यालय बल्कि पूरे शहर के बच्चों को सीखने और अपनी प्रतिभा को विकसित करने के अवसर मिल सकें।

विद्यालय की को-एमडी रिशिता सक्सेना अग्रवाल ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर प्रसिद्ध नृत्यांगना हंसवी टोंक का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक मंच के लिए भी तैयार करती हैं। विद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यशाला कला, संस्कृति और शिक्षा के सुंदर संगम का जीवंत उदाहरण बन गई।





