केवल शिशु का अधिक वजन सिजेरियन का आधार नहीं, मां की शारीरिक स्थिति और प्रसव की प्रगति का भी अहम रोल
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। सहोता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नवप्रीत कौर सहोता ने गर्भवती महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि यदि जांच में गर्भस्थ शिशु का आकार बड़ा बताया जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रसव का तरीका केवल शिशु के वजन के आधार पर तय नहीं किया जाता, बल्कि गर्भवती की संपूर्ण चिकित्सकीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लिया जाता है। डॉ. सहोता ने बताया कि प्रसव से पहले गर्भवती की श्रोणि (पेल्विस) की क्षमता, प्रसव की प्रगति, मां की लंबाई तथा अन्य प्रसूति संबंधी कारकों का विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाता है। यदि चिकित्सकीय जांच में सब कुछ सामान्य पाया जाता है, तो बड़े शिशु की स्थिति में भी सामान्य प्रसव का सुरक्षित प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लगभग 150 सेंटीमीटर लंबाई वाली महिलाओं या जिनमें श्रोणि संकरी होने की संभावना हो, उनमें विशेष चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में समय-समय पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. नवप्रीत कौर सहोता ने गर्भवती महिलाओं से नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने, संतुलित आहार लेने तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय से सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ शिशु का जन्म सुनिश्चित किया जा सकता है।





