भविष्य की चुनौतियों के लिए छात्रों को तैयार करें विद्यालय : सुखविंदर सिंह

क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता पर देना होगा विशेष जोर, वीडियो देखिए 

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। एक ओंकार अकादमी के चेयरमैन सुखविंदर सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा व्यवस्था को भी समय के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य का रोजगार बाज़ार शिक्षा व्यवस्था की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से बदल रहा है। ऐसे में विद्यालयों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यपुस्तक आधारित ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए भी तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अनेक ऐसे रोजगार और कार्यक्षेत्र सामने आएंगे, जिनकी आज केवल कल्पना की जा सकती है। इसलिए विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग), समस्या समाधान की क्षमता, रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता का विकास करना समय की मांग है। इसके साथ ही बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता भी छात्रों के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बननी चाहिए। सुखविंदर सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक और नवाचार के बढ़ते प्रभाव ने रोजगार के स्वरूप को बदलना शुरू कर दिया है। ऐसे में विद्यालयों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को भी अपनाना होगा। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने और भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार करना आवश्यक है। तभी वे बदलती दुनिया में सफल और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकेंगे।

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