जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय बौद्धिक एवं तकनीकी कार्यशाला आयोजित

नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर हुआ मंथन, विशेषज्ञों ने साझा किए नवाचार के सूत्र

काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। हरियावाला स्थित जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल में शिक्षकों के बौद्धिक विकास, तकनीकी दक्षता एवं शिक्षण कौशल को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षकों को नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने किया। उन्होंने सीबीएसई की रिसोर्स पर्सन आकांक्षा का स्वागत करते हुए उन्हें विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं से परिचित कराया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षकों का बौद्धिक विकास ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला है। एक शिक्षक जितना ज्ञानवान और तकनीकी रूप से दक्ष होगा, वह विद्यार्थियों को उतनी ही प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकेगा। सीबीएसई रिसोर्स पर्सन आकांक्षा ने कार्यशाला के दौरान नवीन शिक्षण विधियों, कक्षा शिक्षण में तकनीक के समावेश, गतिविधि आधारित शिक्षा तथा नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया। कार्यशाला के दौरान आयोजित संगोष्ठी में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया। समापन सत्र में रिसोर्स पर्सन ने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को विद्यालयी शिक्षा में सफलतापूर्वक लागू करने के लिए शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षकों का सतत प्रशिक्षण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कुंजी है। कार्यशाला में विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर इसे ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताया।

नवाचार और सतत प्रशिक्षण से ही सशक्त होगी शिक्षा व्यवस्था : मधुमिता बनर्जी

काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने कहा कि एक शिक्षक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। इसलिए शिक्षकों का निरंतर बौद्धिक एवं तकनीकी विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीकों और नवाचारों से लगातार जुड़ना होगा, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवहारिक शिक्षा प्रदान की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी। उन्होंने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं से आजीवन सीखने की भावना बनाए रखते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

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