पिरान कलियर में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, पंजाब से लड्डू गोपाल साथ लेकर पहुंचा परिवार


रुड़की। हरिद्वार जिले के पिरान कलियर में विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक का 758वां सालाना उर्स शुरू हो गया है। उर्स में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन जियारत के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच पंजाब से आया एक परिवार अपने साथ भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल जी को लेकर दरगाह पहुंचा। परिवार के इस अनोखे आस्था भाव ने कलियर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर सामने आई।

पंजाब के मोहाली के बालोंगी क्षेत्र से पहुंचा यह परिवार लड्डू गोपाल जी को अपने साथ लेकर दरगाह साबिर पाक की जियारत करने आया था। परिवार के साथ भगवान के बाल स्वरूप को देखकर वहां मौजूद जायरीनों और अन्य लोगों में उत्सुकता देखने को मिली। कई लोगों ने परिवार से बातचीत की और लड्डू गोपाल जी के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

परिवार का हिस्सा हैं लड्डू गोपाल

परिवार की मुखिया रूबी ने बताया कि परिवार के सभी सदस्य पिरान कलियर में जियारत के लिए आने वाले थे। ऐसे में लड्डू गोपाल जी को घर पर अकेला छोड़ना उन्हें उचित नहीं लगा। इसलिए वह उन्हें भी अपने साथ लेकर कलियर पहुंचीं। रूबी ने बताया कि लड्डू गोपाल जी उनके परिवार का हिस्सा हैं और परिवार की धार्मिक आस्था से जुड़े हुए हैं। जब भी परिवार किसी धार्मिक यात्रा पर जाता है, तो उन्हें साथ रखने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पहले भी पिरान कलियर आ चुका है और यहां का माहौल उन्हें हमेशा आकर्षित करता है।

उर्स की पहली रस्म के साथ हुआ आगाज

पिरान कलियर में 14 अगस्त की देर शाम चांद दिखाई देने के बाद देर रात उर्स की पहली रस्म ‘मेहंदी डोरी’ का आयोजन किया गया। इसी के साथ 758वें सालाना उर्स का औपचारिक आगाज हुआ। उर्स के दौरान बड़ी संख्या में देशभर से जायरीन कलियर पहुंच रहे हैं। शनिवार को पंजाब से पहुंचे परिवार ने भी दरगाह साबिर पाक में जियारत की और अमन-चैन तथा देश में खुशहाली की दुआ मांगी।

लोगों ने मोबाइल कैमरों में कैद किया नजारा

दरगाह परिसर में परिवार के साथ लड्डू गोपाल जी को देखकर कई लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। लोगों ने परिवार के सदस्यों से बातचीत की और लड्डू गोपाल जी के साथ तस्वीरें भी लीं। परिवार के साथ ज्योति, अंजू, संजोति, रानी समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे। उर्स के दौरान सामने आया यह दृश्य धार्मिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल के रूप में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।



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