
आईपीए ने की सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन की अपील
काशीपुर । चिकित्सा विधिक जागरूकता दिवस 17 फरवरी के अवसर पर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) ने चिकित्सकों के विरुद्ध बढ़ते आपराधिक मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आईएपी देशभर के 50,000 से अधिक शिशु रोग विशेषज्ञों का राष्ट्रीय संगठन है, जो बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण, नैतिक चिकित्सा पद्धतियों और सुरक्षित उपचार व्यवस्था के लिए निरंतर कार्यरत है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन, महासचिव डॉ. रुचिरा गुप्ता, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, उत्तराखंड राज्य शाखा अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता, एवं सचिव डॉ. राकेश कुमार ने जारी सयुक्त संदेश में कहा कि चिकित्सा सेवा एक संवेदनशील और जटिल क्षेत्र है, जहां चिकित्सक हर निर्णय मरीज के हित में और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लेते हैं। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान प्रतिकूल परिणाम होना मात्र अपराध नहीं माना जा सकता। इसे आपराधिक लापरवाही के रूप में देखना न्यायसंगत नहीं है। कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य सहित विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि चिकित्सकों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई केवल गंभीर एवं स्पष्ट चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में ही की जानी चाहिए। किसी भी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से पूर्व प्रारंभिक जांच तथा स्वतंत्र एवं योग्य चिकित्सकीय विशेषज्ञ की राय अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सकों की गिरफ्तारी केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही की जानी चाहिए, अन्यथा इससे चिकित्सा समुदाय में भय और असुरक्षा का वातावरण बनता है, जिसका सीधा असर मरीजों की सेवा पर पड़ता है। “यदि चिकित्सक भय के माहौल में काम करेंगे तो इसका दुष्प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर पड़ेगा,” उन्होंने कहा। आईएपी ने विधि प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि वे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही समाचार माध्यमों से भी अनुरोध किया गया है कि वे चिकित्सा मामलों की रिपोर्टिंग में संतुलित, तथ्यात्मक और उत्तरदायी दृष्टिकोण अपनाएं, ताकि बिना सत्यापन के किसी चिकित्सक की प्रतिष्ठा को आघात न पहुंचे।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स का संदेश
काशीपुर। आईपीए उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने कहा कि चिकित्सा विधिक जागरूकता दिवस का उद्देश्य चिकित्सकों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा समाज के बीच बेहतर समझ और संवाद स्थापित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्यायसंगत और संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर ही मरीजों और चिकित्सकों दोनों के हितों की रक्षा की जा सकती है।
