जीडी गोयंका में शास्त्रीय नृत्य कार्यशाला का आयोजन, छात्राओं ने सीखी भारतीय संस्कृति की लय और अभिव्यक्ति

प्रख्यात नृत्यांगना हंसवी टोंक ने दी प्रशिक्षण की बारीकियां, विभिन्न विद्यालयों के छात्राओं व माताओं ने की सहभागिता

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल, काशीपुर में शुक्रवार को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से छात्राओं व उनकी माताओं को परिचित कराने के उद्देश्य से आज शुक्रवार को दो दिवसीय शास्त्रीय नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम से पूर्व विद्यालय की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने कार्यशाला की संचालिका एवं मुख्य अतिथि प्रसिद्ध  प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना सुश्री हंसवी टोंक का  बुकें भेंट कर लियास्वागत किया। कार्यशाला में विद्यालय की छात्राओं के साथ-साथ अन्य विद्यालयों एवं दूर-दराज के क्षेत्रों से आए छात्राओं और उनकी माताओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का संचालन प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना सुश्री हंसवी टोंक द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मूलभूत तकनीकों, विभिन्न नृत्य मुद्राओं, हस्त मुद्राओं (हैंड जेस्चर), चेहरे के भावों तथा लयबद्ध गतिविधियों की बारीकियों से अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने नृत्य को केवल एक कला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अनुशासन और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में शामिल छात्राओं ने पूरे उत्साह और लगन के साथ अभ्यास किया तथा शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न शैलियों से जुड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पक्षों को समझा। प्रतिभागियों ने नृत्य के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति, संतुलन और आत्मविश्वास विकसित करने की महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यशाला ने न केवल प्रतिभागियों के कलात्मक कौशल को निखारा, बल्कि उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जोड़ने का कार्य किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इसे प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव बताते हुए ऐसी कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का सशक्त माध्यम है शास्त्रीय नृत्य : मधुमिता बनर्जी

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने शास्त्रीय नृत्य कार्यशाला के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल एक कला नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, मूल्यों और परंपराओं का जीवंत स्वरूप है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करना है। शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाएं बच्चों में सौंदर्यबोध, एकाग्रता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करती हैं। मधुमिता बनर्जी ने कार्यशाला में शामिल सभी प्रतिभागियों, मस्सताओं और प्रशिक्षक हंसवी टोंक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

भारतीय शास्त्रीय नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान का अमूल्य धरोहर : रिशिता सक्सेना अग्रवाल

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल की को-एमडी रिशिता सक्सेना अग्रवाल ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जीवन मूल्यों का सशक्त प्रतीक है। विद्यार्थियों को ऐसी कलाओं से जोड़ना केवल उनकी प्रतिभा को निखारना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और सभ्यता से परिचित कराना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है। शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाएं बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, एकाग्रता, रचनात्मक सोच और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करती हैं। रिशिता सक्सेना अग्रवाल ने कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कार्यशाला की सफलता पर सभी प्रतिभागियों, माताओं एवं प्रशिक्षक हंसवी टोंक को बधाई देते हुए इसे प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक पहल बताया।

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