केवीआर हॉस्पिटल में डॉ. शुभम अग्रवाल ने क्षेत्र का पहला सफल वायरलेस पेसमेकर प्रत्यारोपण कर रचा इतिहास

वायरलेस पेसमेकर से करीब 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को मिला नया जीवन

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए केवीआर हॉस्पिटल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम अग्रवाल ने क्षेत्र में पहली बार एक बुजुर्ग महिला के दिल में सफलतापूर्वक वायरलेस पेसमेकर स्थापित कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। इस अत्याधुनिक प्रक्रिया की सफलता के साथ ही काशीपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र निवासी लगभग 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला लंबे समय से गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थीं। उन्हें बार-बार रक्तचाप (बीपी) कम होने, हृदय की धड़कन अत्यधिक धीमी और असामान्य होने तथा अचानक बेहोश हो जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। परिजन उन्हें कई अस्पतालों में दिखा चुके थे, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। हाल ही में महिला की हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें बेहोशी की अवस्था में केवीआर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉ. शुभम अग्रवाल और उनकी टीम ने तत्काल मरीज की ईसीजी, ईकोकार्डियोग्राफी एवं अन्य आवश्यक जांचें कराईं। जांच रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि महिला की स्थिति अत्यंत गंभीर है तथा सामान्य उपचार पर्याप्त नहीं होगा। मरीज की अधिक आयु और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को देखते हुए पारंपरिक (कन्वेंशनल) स्थायी पेसमेकर लगाना जोखिमपूर्ण माना गया। ऐसे में डॉ. अग्रवाल ने अत्याधुनिक वायरलेस पेसमेकर प्रत्यारोपित करने का सुझाव दिया।

परिजनों ने चिकित्सक की सलाह पर सहमति प्रदान की। मरीज की धड़कन और रक्तचाप अत्यधिक कम होने के कारण सबसे पहले उसे स्थिर करने के लिए अस्पताल की कैथ लैब में भर्ती किया गया, जहां आपातकालीन व्यवस्था के तहत टेम्परेरी पेसमेकर स्थापित किया गया। इससे मरीज की स्थिति में सुधार आने के बाद विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक टेम्परेरी पेसमेकर को हटाकर स्थायी वायरलेस पेसमेकर प्रत्यारोपित कर दिया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और अगले दिन स्वास्थ्य परीक्षण में महिला की स्थिति सामान्य पाई गई। चिकित्सकों ने आवश्यक सलाह और दवाइयों के साथ मरीज को घर भेज दिया। उपचार के बाद महिला के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। मरीज के परिजनों ने सफल उपचार के लिए डॉ. शुभम अग्रवाल एवं केवीआर हॉस्पिटल के समस्त चिकित्सकीय और नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया। वहीं चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से काशीपुर और आसपास के मरीजों को अब उन्नत हृदय उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यह सफलता क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक है वायरलेस तकनीक : डॉ. शुभम

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। केवीआर हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम अग्रवाल ने बताया कि हृदय की धड़कन असामान्य रूप से धीमी होने पर पेसमेकर मरीज के लिए जीवनरक्षक उपकरण साबित होता है। वर्तमान में पारंपरिक (कन्वेंशनल) पेसमेकर और अत्याधुनिक वायरलेस पेसमेकर दोनों विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन तकनीक और मरीज की सुविधा के लिहाज से दोनों में महत्वपूर्ण अंतर है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार पारंपरिक पेसमेकर को छाती के ऊपरी हिस्से में क्लेविकल (कॉलर बोन) के नीचे स्थापित किया जाता है। इसके लिए त्वचा में चीरा लगाकर पेसमेकर को प्रत्यारोपित किया जाता है तथा तारों (लीड्स) को नसों के माध्यम से हृदय तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज को टांके लगते हैं और सामान्यतः कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहकर निगरानी में रखना पड़ता है। साथ ही भविष्य में तारों से संबंधित संक्रमण या अन्य तकनीकी जटिलताओं की संभावना भी बनी रहती है।
इसके विपरीत वायरलेस पेसमेकर पूरी तरह नई तकनीक पर आधारित है। इसे छाती में चीरा लगाए बिना जांघ की नस (फेमोरल वेन) के रास्ते कैथेटर की सहायता से सीधे हृदय के भीतर स्थापित किया जाता है। इसमें किसी प्रकार की लीड या तार नहीं होती और न ही मरीज को छाती पर टांके लगवाने पड़ते हैं। यही कारण है कि संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि वायरलेस पेसमेकर लगाने के बाद मरीज की रिकवरी अपेक्षाकृत तेज होती है। अधिकांश मामलों में मरीज को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा जा सकता है, जबकि पारंपरिक पेसमेकर में अस्पताल में अधिक समय तक भर्ती रहने की आवश्यकता पड़ सकती है। डॉ. शुभम अग्रवाल ने कहा कि अधिक उम्र के मरीजों तथा जटिल स्वास्थ्य स्थितियों वाले रोगियों के लिए वायरलेस पेसमेकर एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। हालांकि किस मरीज के लिए कौन-सा पेसमेकर उपयुक्त रहेगा, इसका निर्णय विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर ही किया जाता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से अब हृदय रोगियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और बेहतर उपचार उपलब्ध हो रहा है।

हृदय रोग के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच से बच सकती है जान : डॉ. शुभम अग्रवाल

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। केवीआर हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम अग्रवाल ने कहा है कि हृदय रोग आज केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। ऐसे में शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर जांच जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार सीने में दर्द या दबाव महसूस होना, सांस फूलना, तेज या अनियमित धड़कन, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, बार-बार बेहोश होना, पैरों में सूजन तथा अचानक पसीना आना हृदय रोग के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।
उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक हैं। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। डॉ. शुभम अग्रवाल ने सलाह दी कि 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से रक्तचाप, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जांच करानी चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण तथा तंबाकू और धूम्रपान से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि यदि सीने में दर्द, अचानक सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसी समस्या हो तो इसे कभी भी हल्के में न लें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश हृदय रोगों का सफलतापूर्वक इलाज संभव है तथा गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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