मां के दूध का कोई विकल्प नहीं, डायलूटेड दूध से बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर: डॉ. रवि सहोता

ढाई माह के शिशु का वजन मात्र 300 ग्राम बढ़ा, चिकित्सक ने अभिभावकों को दी सही पोषण की सलाह

काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। सहोता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं न्यूरो ट्रॉमा सेंटर के प्रबंधक एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सहोता ने नवजात एवं शिशुओं के पोषण को लेकर अभिभावकों को महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा कि जन्म के बाद शुरुआती छह माह तक बच्चे के लिए मां का दूध ही सर्वोत्तम और संपूर्ण आहार है। इसकी जगह किसी भी प्रकार का डायलूटेड (अधिक पानी मिलाकर तैयार किया गया) दूध देना बच्चे के शारीरिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

डॉ. सहोता ने बताया कि गुरुवार को एक महिला अपने ढाई माह के शिशु को अस्पताल लेकर पहुंची। जन्म के समय बच्चे का वजन लगभग तीन किलोग्राम था, जबकि ढाई माह बाद उसका वजन केवल तीन किलोग्राम 300 ग्राम पाया गया। जांच और परामर्श के दौरान पता चला कि बच्चे को मां का दूध बिल्कुल नहीं पिलाया जा रहा था। इसके स्थान पर उसे टॉप फीड दिया जा रहा था, जिसे निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक पानी मिलाकर तैयार किया जाता था। इससे बच्चे को आवश्यक कैलोरी, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व नहीं मिल पाए, जिसके कारण उसका वजन नहीं बढ़ सका।
उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में “फेल्योर टू थ्राइव” कहा जाता है, जिसमें बच्चे का शारीरिक विकास सामान्य गति से नहीं हो पाता। डॉ. सहोता ने कहा कि यदि किसी कारणवश मां का दूध उपलब्ध न हो और चिकित्सकीय सलाह पर फार्मूला फीड देना पड़े, तो उसे निर्धारित अनुपात में ही तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से शिशु के पोषण संबंधी किसी भी निर्णय से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेने की अपील की।

 

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