कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता एवं समयबद्धता पर दिया जोर


ऋषिकेश : श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में निदेशक परिसर एवं संकायध्यक्षों/विभागाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने की। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय की वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, जवाबदेह तथा समयबद्ध बनाना था।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसकी शैक्षणिक उत्कृष्टता से ही नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शी, उत्तरदायी एवं दक्ष प्रशासनिक व्यवस्था से भी होती है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विश्वविद्यालय की वित्तीय प्रक्रियाएँ पूर्णतः नियमसम्मत, पारदर्शी एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपन्न होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रकार के भुगतान अधिकतम 10 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर हर हाल में सुनिश्चित किए जाएँ, ताकि किसी भी कर्मचारी, आपूर्तिकर्ता अथवा संबंधित पक्ष का भुगतान अनावश्यक रूप से लंबित न रहे। उन्होंने कहा कि समयबद्ध भुगतान व्यवस्था न केवल प्रशासनिक दक्षता का परिचायक है, बल्कि यह संस्थान की विश्वसनीयता और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

उन्होंने विश्वविद्यालय अधिकारियों एवं प्राध्यापकों से कहा कि सभी अनुभाग/विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा आवश्यक अभिलेख पूर्ण, सटीक एवं त्रुटिरहित रूप में समय पर उपलब्ध कराएं। यदि दस्तावेज समय पर प्राप्त होंगे तो भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब स्वतः समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा पर आधारित होगी तथा प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को इसी भावना के साथ कार्य करना होगा।कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय आधुनिक एवं डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था को अपनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। वित्तीय प्रक्रियाओं का सरलीकरण, अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण तथा विभिन्न कार्यालयों के मध्य प्रभावी समन्वय विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वरिष्ठ वित्त अधिकारी मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य प्रत्येक भुगतान को 10 दिनों के भीतर जारी करना है। इसके लिए आवश्यक है कि सभी प्राध्यापक एवं विभाग निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि भुगतान संबंधी प्रत्येक स्तर की नियमित समीक्षा की जाएगी तथा ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे कोई भी फाइल अनावश्यक रूप से किसी कार्यालय में लंबित न रहे।बैठक में भुगतान प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन, क्लेम प्रस्तुत करने की प्रणाली, अभिलेखों के रखरखाव तथा वित्तीय कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिन पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला के अंत में कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी एवं संकायध्यक्ष/विभागाध्यक्ष सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ कार्य करते हुए श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय को सुशासन, पारदर्शिता, समयबद्ध सेवा एवं उत्कृष्ट प्रशासन का आदर्श संस्थान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश चंद्रा, वरिष्ठ वित्त अधिकारी मनोज कुमार पाण्डेय, परिसर निदेशक प्रो. एम. एस. रावत, डीन कला संकाय प्रो. पी. के. सिंह, डीन छात्र कल्याण (DSW) प्रो. हेमलता मिश्रा, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. जी. के. ढींगरा, प्रोफेसर धर्मेंद्र तिवारी, प्रोफेसर संगीता मिश्रा, प्रोफेसर अंजनी दुबे, डॉक्टर गौरव वर्ष्णेय , डॉ शिखा मंगाई, डॉ नीता पांडे, डॉ दीपा शर्मा, प्रोफेसर बीडी पांडे तथा विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश के समस्त विभागाध्यक्ष एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।



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