कॉइल और लिक्विड रिपेलेंट का सीमित उपयोग करें, छोटे बच्चों की त्वचा पर सीधे रोल-ऑन न लगाएं
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। बरसातों के मौसम में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच अभिभावकों के लिए बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। सहोता मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक एवं सुप्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सहोता ने बताया कि बाजार में कॉइल, लिक्विड रिपेलेंट और रोल-ऑन जैसे कई प्रकार के मच्छर भगाने वाले उत्पाद उपलब्ध हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए इनका उपयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जन्म के पहले दो माह तक किसी भी प्रकार के केमिकल युक्त मच्छर प्रतिरोधक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस अवधि में मच्छरदानी ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है। दो माह से अधिक आयु के बच्चों के लिए रोल-ऑन का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे बच्चे की त्वचा पर सीधे लगाने के बजाय केवल कपड़ों पर ही लगाना चाहिए।
डॉ. रवि सहोता ने चेतावनी दी कि कॉइल का धुआं बच्चों के श्वसन तंत्र को प्रभावित कर एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए। यदि लिक्विड रिपेलेंट का उपयोग किया जाए तो उसे दो घंटे चालू और दो घंटे बंद रखने के साथ कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को हमेशा पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं और मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें। उनके अनुसार यही उपाय बच्चों को मच्छरों से होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है।





