सत्य निकेतन इमारत हादसा : पीजी संचालक गिरफ्तार, असुरक्षित भवनों पर एमसीडी सख्त


नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में जर्जर पांच मंजिला इमारत के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे में सात लोगों की मौत के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में पुलिस ने पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया है। वह इस मामले में चौथा आरोपी बताया जा रहा है। हादसे में 12 लोगों को सुरक्षित बचाया गया था, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की असुरक्षित इमारतों को लेकर भी सख्ती शुरू कर दी है। दुर्घटनाग्रस्त भवन के पास स्थित एक असुरक्षित बहुमंजिला इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी अन्य संभावित हादसे को रोकना है।

इससे पहले दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने हादसे में ढही इमारत के मालिक महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। वहीं, ड्यूटी मजिस्ट्रेट भव्य करहैल ने महेश गुप्ता के माता-पिता हरिराम गुप्ता और ऊर्मिला गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, मामले में तीन आरोपियों को सात सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि भवन का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि इमारत ऊर्मिला गुप्ता के नाम से पंजीकृत थी। इस भवन में संचालित पीजी का प्रबंधन महेश गुप्ता संभालता था।

पुलिस के मुताबिक, हरिराम गुप्ता की उम्र 81 वर्ष, ऊर्मिला गुप्ता की 75 वर्ष और महेश गुप्ता की उम्र 52 वर्ष है। हरिराम गुप्ता भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं, जबकि महेश गुप्ता हार्डवेयर और पेंट की दुकान चलाता है। हादसे के बाद पुलिस मामले में भवन की स्थिति, निर्माण और पीजी संचालन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

असुरक्षित भवनों की निगरानी बढ़ी

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। निगम ने ऐसे भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

इसी सिलसिले में एमसीडी के पूर्वी जोन के चेयरमैन यशपाल सिंह कैंतुरा ने भवन विभाग समेत संबंधित अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि क्षेत्र में कमजोर, जर्जर और नियमों के विपरीत निर्मित भवनों की नियमित निगरानी की जाए। जरूरत पड़ने पर ऐसे भवनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में पुराने और असुरक्षित भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद अब निगम और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी इमारतों की समय रहते पहचान कर कार्रवाई करना है, ताकि लोगों की जान को खतरे में डालने वाली स्थितियों को रोका जा सके।



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