पंच और किक की ताकत, रिकवरी, पोषण व स्वास्थ्य जांच पर विशेषज्ञ सलाह से खिलाड़ियों में दिखा उत्साह
काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। रामनगर रोड स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) परिसर में आयोजित जिला ताइक्वांडो प्रतियोगिता में नगर के सुप्रसिद्ध बाल रोग एवं नवजात विशेषज्ञ तथा आईएपी उत्तराखंड के स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. रवि सहोता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेल विज्ञान, फिटनेस और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। प्रतियोगिता के दौरान डॉ. रवि सहोता ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि ताइक्वांडो जैसे खेलों में सफलता केवल शारीरिक ताकत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि गति, तकनीक और संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को सरल वैज्ञानिक तरीके से समझाया कि किसी पंच या किक की ताकत शरीर के वजन, किक की गति और इम्पैक्ट टाइम पर आधारित होती है। उन्होंने बताया कि बेहतर तकनीक, तेज गति और सही हिप रोटेशन रखने वाला खिलाड़ी अधिक प्रभावशाली प्रदर्शन कर सकता है। डॉ. सहोता ने उदाहरण देते हुए कहा कि (किक की ताकत = शरीर का वजन × किक की रफ्तार ÷ टक्कर का समय) लगभग 45 किलोग्राम का खिलाड़ी करीब 4500 न्यूटन तथा 50 किलोग्राम का खिलाड़ी लगभग 5000 न्यूटन तक की किक फोर्स उत्पन्न कर सकता है। उनके इस वैज्ञानिक विश्लेषण को खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने काफी रुचि के साथ सुना।

डॉ. सहोता ने खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के दौरान शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए सही ब्रीदिंग तकनीक अपनाने, पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बाउट्स के बीच शरीर की शीघ्र रिकवरी बेहद आवश्यक होती है, जिससे खिलाड़ी अगले मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन कर सके। उन्होंने प्रतियोगिता से पूर्व संतुलित और हल्के भोजन पर विशेष जोर देते हुए केला, खजूर और ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों को लाभकारी बताया, जबकि तला-भुना और भारी भोजन से बचने की सलाह दी। अपने संबोधन में डॉ. रवि सहोता ने खिलाड़ियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल शुरू करने से पहले विशेष रूप से हृदय संबंधी जांच, जैसे इको कार्डियोग्राफी (ईको), कई छिपी हुई स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान करने में सहायक हो सकती है। इससे खेल के दौरान संभावित जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह अनुशासन, आत्मविश्वास, मानसिक दृढ़ता और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का सशक्त जरिया भी हैं। उनके प्रेरणादायी संबोधन से खिलाड़ियों में नया उत्साह देखने को मिला।



