जंतर-मंतर आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान तक, जानें कौन हैं उत्तराखंड की छात्र नेता नेहा बोरा


नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों के हालिया आंदोलन ने कई नए चेहरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, जिनमें छात्र नेता नेहा बोरा सबसे प्रमुख नाम बनकर उभरी हैं। 23 दिनों तक चली उनकी भूख हड़ताल, शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज़ और आंदोलन के दौरान दिए गए प्रभावशाली भाषणों ने उन्हें देशभर में चर्चा का विषय बना दिया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त हो गया, लेकिन आंदोलन के दौरान नेहा बोरा की भूमिका लगातार सुर्खियों में रही। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, समान अवसर और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाया।

23 दिन की भूख हड़ताल बनी पहचान

आंदोलन के दौरान नेहा बोरा ने लगातार 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती रही और डॉक्टरों ने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई। शारीरिक कमजोरी के बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा, जिससे वे आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गईं।

भाषणों ने बटोरी सुर्खियां

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद नेहा बोरा का भाषण सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों के संघर्ष और उन पर पड़े चोट के निशान इस आंदोलन की कहानी हमेशा याद दिलाते रहेंगे। उनके कई भाषणों को युवाओं के बीच व्यापक समर्थन मिला।

उत्तराखंड से हैं नेहा बोरा

नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। बचपन का कुछ समय पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में बीता। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से पीएचडी कर रही हैं।

छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका

नेहा बोरा वर्तमान में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। छात्र राजनीति के साथ-साथ वे लंबे समय से शिक्षा, सामाजिक न्याय, पेपर लीक, शिक्षा के निजीकरण और अन्य सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रही हैं।

कई प्रमुख हस्तियों ने की मुलाकात

भूख हड़ताल के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां नेहा बोरा से मिलने पहुंचीं। इनमें अरविंद केजरीवाल, चंद्रशेखर आज़ाद, अभिनेत्री शबाना आज़मी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रमुख रहे। आंदोलन के दौरान राहुल गांधी के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

समर्थक और आलोचक दोनों

नेहा बोरा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग राय सामने आई हैं। समर्थक उन्हें छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध की मजबूत आवाज़ मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हैं। हालांकि, यह निर्विवाद है कि जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित छात्र नेताओं की सूची में शामिल कर दिया है।



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