जीडी गोयंका विद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बैशाखी का पावन पर्व

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी शाम, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने बाँधा समां; मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित

बैशाखी का यह पावन त्योहार,
लाया खुशियों की भरमार,
चारों तरफ है फसलों की बहार,
उमंग से झूमा आज जी डी गोयन्का परिवार।

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। जीडी गोयंका विद्यालय में आज बैशाखी का पावन पर्व अत्यंत उत्साह, उल्लास एवं भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अभिभावकों का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने हेतु उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कक्षा 10 से 12 तक के छात्र-छात्राओं द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी गई। विद्यार्थियों ने गुरुवाणी, विचार-वाचन, कविता, गायन और नृत्य के माध्यम से बैशाखी के महत्व को जीवंत कर दिया, जिससे उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।

प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने अपने संबोधन में बताया कि बैशाखी का पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस समय गेहूँ की फसल पककर तैयार होती है और इसी खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी तथा यह दिवस जलियांवाला बाग के शहीदों की वीरता और बलिदान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा और प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि जीडी गोयंका विद्यालय काशीपुर के लिए गौरव का विषय है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहता है। विद्यालय प्रबंधन की योजनाबद्ध कार्यशैली और शैक्षिक उत्कृष्टता की भी उन्होंने प्रशंसा की। कार्यक्रम के अंत में सीनियर विंग कोऑर्डिनेटर रीना चौधरी ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर अभिभावकों को गत वर्ष की उपलब्धियों से अवगत कराया। इसके पश्चात प्रधानाचार्या द्वारा कक्षा 9 और 11 के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मिडिल विंग कोऑर्डिनेटर अंजू चावला, जूनियर विंग को-ऑर्डिनेटर बुशरा सिद्दीकी, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित किया, बल्कि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और रचनात्मकता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया।

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