हिंदी देश की संस्कृति, एकता और पहचान का प्रतीक, युवाओं में भाषा के प्रति गौरव की भावना जरूरी
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)।उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता महेश चंद्र आर्या ने कहा कि आदि जननी कही जाने वाली हिंदी भाषा के प्रति आज युवाओं में इसकी महत्ता कम होती दिखाई दे रही है। उच्च शिक्षा, तकनीकी क्षेत्र, कॉरपोरेट जगत से लेकर इंटरनेट, सॉफ्टवेयर और वैश्विक संवाद में अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जा रही है, जो भारतीयों के लिए चिंता का विषय है।
वरिष्ठ प्रवक्ता मेजर मुनीशकांत शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने वाली भाषा है। इतिहास में जो बातें लिखित रूप में दिखाई नहीं देतीं, वे साहित्य में जीवंत दिखाई देती हैं। इसलिए प्रत्येक भारतीय को अपनी हिंदी भाषा पर गर्व होना चाहिए। प्रधानाचार्य बृजेश कुमार गुप्ता ने शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी देश की संस्कृति, एकता और पहचान का प्रतीक है। यह विभिन्न राज्यों और भाषाओं के बीच सेतु का कार्य करते हुए देश को एकता के सूत्र में बांधने के साथ हमारी संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि सभ्यता और संस्कारों से जुड़ी हिंदी भाषा को दैनिक जीवन में आत्मसात करना जरूरी है। इसके विकास और संवर्धन के लिए सभी को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में ओज कवि एवं शिक्षक शुभम लोहनी ने हिंदी के प्रति अपेक्षित व्यवहार पर आधारित अपनी काव्य रचना “बिन हिंदी को जाने हिंदुस्तान समझना मुश्किल है” का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर मेजर मुनीशकांत शर्मा, मनोज कुमार शर्मा, विजय पाल सिंह चौहान, रणधीर सिंह, कौशलेश गुप्ता, दिनेश चंद्र गोस्वामी, अनिल कुमार सिंह, रामचंद्र सिंह, मनोज कुमार विश्नोई, रंजना चौहान, एकता अग्रवाल समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।





