रुद्रपुर में विद्युत दर वृद्धि के प्रस्ताव पर उद्योगों का विरोध

यूईआरसी की जनसुनवाई में 16 प्रतिशत बढ़ोतरी पर पुनर्विचार की मांग, स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर भी उठे सवाल

रुद्रपुर (काशीपुर वार्ता)। उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की प्रस्तावित विद्युत दर वृद्धि पर उपभोक्ताओं से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित करने के उद्देश्य से विकास भवन, रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) के सभागार में जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में यूईआरसी के चेयरमैन एम. एल. प्रसाद, सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा, निदेशक (वित्त) दीपक पाण्डेय, सचिव नीरज सती सहित आयोग एवं यूपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जनसुनवाई में कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (केजीसीसीआई) के अध्यक्ष पवन अग्रवाल के नेतृत्व में उद्योग प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित लगभग 16 प्रतिशत से अधिक की विद्युत दर वृद्धि का कड़ा विरोध दर्ज कराया। चैम्बर की पावर सब-कमेटी के चेयरमैन अधिवक्ता शकील अहमद सिद्दीकी ने कहा कि प्रस्तावित बढ़ोतरी उद्योगों पर गंभीर आर्थिक प्रभाव डालेगी। उन्होंने कहा कि उद्योग पहले से ही कच्चे माल, परिवहन एवं अन्य परिचालन लागतों के बढ़ते दबाव से जूझ रहे हैं, ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य के विद्युत राजस्व में उद्योगों का योगदान लगभग 50 प्रतिशत से अधिक है, इसके बावजूद लगातार बढ़ती दरें उनकी लाभप्रदता और निवेश योजनाओं को कमजोर कर रही हैं। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में अपेक्षाकृत स्थिर विद्युत दरों के कारण वहां के उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल रहा है, जबकि उत्तराखण्ड में निरंतर बढ़ती दरें औद्योगिक पलायन की आशंका को बढ़ा रही हैं। उच्च दरों एवं विभिन्न अधिभारों के चलते उद्योग वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जिससे वितरण कंपनियों के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही वोल्टेज एवं लोड आधारित टैरिफ लागू न होने से उच्च वोल्टेज उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उन्होंने आयोग से प्रस्तावित वृद्धि पर पुनर्विचार कर संतुलित एवं वहनीय दर संरचना सुनिश्चित करने का आग्रह किया। चैम्बर के निवर्तमान अध्यक्ष अशोक बंसल ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से पूर्व उपभोक्ताओं को आश्वासन दिया गया था कि इससे विद्युत बिलों में कमी आएगी, मीटरों को प्री-पेड प्रणाली में परिवर्तित किया जाएगा तथा मोबाइल एप पर बिल की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, किंतु अभी तक इन वादों को पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद से कई उद्योगों के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया है।

अशोक बंसल ने कहा कि लगातार बढ़ती विद्युत दरें राज्य की औद्योगिक नीतियों की भावना के विपरीत हैं, जिनका उद्देश्य निवेश को आकर्षित करना और उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। यदि प्रस्तावित वृद्धि लागू की जाती है, तो इससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी तथा नए निवेशकों का आकर्षण कम हो सकता है। उन्होंने यूईआरसी से रोजगार, राज्य के राजस्व और औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 में विद्युत दर वृद्धि की अनुमति न देने का आग्रह किया। जनसुनवाई में चैम्बर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश कुमार मिड्ढा, पावर सब-कमेटी के चेयरमैन अधिवक्ता शकील अहमद सिद्दीकी, संजय कुमार अदलखा, सुशील कुमार तुल्स्यान सहित अन्य पदाधिकारी एवं उद्योग प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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