35 वर्ष पहले काशीपुर में मनाया था जनकवि का 80वां जन्मदिन, प्रो. डॉ. वाचस्पति शर्मा के आवास पर जुटे थे देशभर के साहित्यकार

जन कवि बाबा नागार्जुन को जन्मदिन पर उपहार भेंट करते दैनिक जागरण के तत्कालीन ब्यूरो चीफ सुरेश शर्मा एवं अन्य साहित्यकार
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। देश के सुप्रसिद्ध जनकवि, लेखक, उपन्यासकार एवं हिंदी-मैथिली साहित्य के अप्रतिम हस्ताक्षर बाबा नागार्जुन की 115वीं जयंती पर साहित्य प्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को याद किया। वर्ष 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 1994 में साहित्य अकादमी फैलोशिप से सम्मानित बाबा नागार्जुन का काशीपुर नगर से भी गहरा आत्मीय संबंध रहा है, जिसकी यादें आज भी साहित्यिक जगत में जीवंत हैं। करीब 35 वर्ष पूर्व, 30 जून 1991 को बाबा नागार्जुन ने अपना 80वां जन्मदिन काशीपुर के बद्री सभा भवन रोड स्थित हिंदी के प्रख्यात विद्वान एवं तत्कालीन राधे हरि राजकीय महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वाचस्पति शर्मा के आवास पर बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया था। इस अवसर पर देश के अनेक साहित्यकार, लेखक, कवि एवं नगर के प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे थे। कार्यक्रम के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस समय दैनिक जागरण के तत्कालीन प्रभारी सुरेश शर्मा सहित पंजाब केसरी के पत्रकार सुरेन्द्र सूरी, पत्रकार प्रकाश जोशी, हास्य कवि शरीफ भारती तथा साहित्यकार योगेश पंत सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने बाबा नागार्जुन के साथ अविस्मरणीय पल साझा किए थे। प्रो. डॉ. वाचस्पति शर्मा और बाबा नागार्जुन के बीच गहरा आत्मीय एवं साहित्यिक संबंध था, जिसके चलते उनका काशीपुर प्रवास लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। 30 जून 1911 को बिहार के दरभंगा जिले के तरौनी गांव में वैद्यनाथ मिश्र के रूप में जन्मे बाबा नागार्जुन की 115वीं जयंती पर काशीपुर ने किया स्मरण, साहित्यिक विरासत को किया नमन नागार्जुन ने हिंदी और मैथिली साहित्य को नई दिशा दी। उनकी रचनाओं में जनजीवन, सामाजिक विषमता, किसान, मजदूर और आम आदमी की पीड़ा को सशक्त स्वर मिला। उनकी जयंती पर देशभर में साहित्यिक गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों और स्मृति आयोजनों के माध्यम से उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है। उल्लेखनीय है कि प्राचीन भारतीय परंपरा में एक अन्य महान बौद्ध दार्शनिक एवं रसायनशास्त्री ‘नागार्जुन’ का भी उल्लेख मिलता है, किंतु जनकवि बाबा नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र) का व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान अलग एवं विशिष्ट है। उनकी रचनाएं आज भी समाज को सच बोलने और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने की प्रेरणा देती हैं।




