गुरु मदन सिंह भंडारी से मुलाकात कर स्वरचित काव्य संकलन ‘कल्पना ज्योति’ की भेंट
काशीपुर (कशीपुर वार्ता)। शिक्षक दिवस के अवसर पर रामनगर रोड स्थित चामुंडा हॉस्पिटल के प्रबंधक एवं वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. यशपाल रावत ने अपने जीवन के पहले गुरु का सम्मान कर गुरु-शिष्य परंपरा की सुंदर मिसाल पेश की। उन्होंने अपने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक एवं लगभग 90 वर्षीय गुरुजी मदन सिंह भंडारी से उनके आवास पर पहुंचकर मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। डॉ. रावत ने गुरुजी के साथ बिताए अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरणों को याद करते हुए कहा कि जीवन में माता-पिता के बाद गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान, संस्कार और अनुशासन ही व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं भविष्य की नींव मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके प्रथम गुरु का मार्गदर्शन और शिक्षाएं सदैव प्रेरणास्रोत रही हैं। भेंट के दौरान डॉ. रावत ने अपनी स्वरचित काव्य कृति ‘कल्पना ज्योति’ गुरुजी को ससम्मान भेंट की। अपनी रचना को अपने पहले गुरु के हाथों में सौंपना उनके लिए भावुक और आनंददायक क्षण रहा।
गुरु मदन सिंह भंडारी ने अपने शिष्य डॉ. यशपाल रावत से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षक के लिए इससे बड़ा सौभाग्य और संतोष की बात कोई नहीं हो सकती कि उसका पढ़ाया हुआ विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त कर समाज के लिए उपयोगी कार्य करे और वर्षों बाद भी अपने गुरु को याद रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को संस्कार, अनुशासन, मेहनत, ईमानदारी और मानवता का पाठ भी पढ़ाता है। यही गुण आगे चलकर व्यक्ति को एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। उन्होंने डॉ. रावत को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिश्रम और लगन से चिकित्सा के क्षेत्र में पहचान बनाई है, यह उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कामना की कि डॉ. रावत सदैव जरूरतमंदों की सेवा को प्राथमिकता दें और अपने ज्ञान एवं अनुभव का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाते रहें। उन्होंने डॉ. रावत के उज्ज्वल, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।




