सुदामा चरित्र से परीक्षित मोक्ष तक सुनाए प्रसंग, नाम संकीर्तन की महिमा बताई

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देहरादून : सिद्धपीठ प्राचीन श्री शिव मंदिर, धर्मपुर चौक में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस एवं विश्राम अवसर पर कथा व्यास आचार्य अरुण सती जी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं और श्रीमद्भागवत के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कथा के विश्राम अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के 16,107 विवाह, भौमासुर वध, भगवान के गृहस्थ जीवन, सुदामा चरित्र, पांडवों की राजसूय यज्ञ कथा, जरासंध वध और शिशुपाल उद्धार का वर्णन किया। उन्होंने यदुवंश को मिले श्राप एवं यदुवंश के संहार, भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन, शुकदेव जी के अंतिम उपदेश एवं प्रस्थान तथा राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग भी सुनाया।

उन्होंने कलियुग के राजाओं का वर्णन करते हुए नाम संकीर्तन की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण, जप और संकीर्तन मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के कल्याण की भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरविंद कुमार रहे। इस अवसर पर सीताराम भट्ट, सुरेंद्र गुप्ता, रमन गुप्ता, आर.के. तायल, देवेंद्र अग्रवाल, आत्माराम, दीपक शर्मा, रामदास जायसवाल, प्रमोद शर्मा, सुनील कौशिक, मदन हुरला, जय प्रकाश बंसल, सुदेश हुरला, शर्मिला भट्ट, मंजू शर्मा और अर्चना ठाकुर सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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