औद्योगिक विकास को गति देने के लिए केजीसीसीआई ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

मंडी शुल्क में छूट, प्रतिस्पर्धी बिजली दरें और लॉजिस्टिक सुविधाएं बढ़ाने की मांग

हल्द्वानी (काशीपुर वार्ता)। प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन के दौरान कुमाऊँ गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) ने  शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य के औद्योगिक विकास, निवेश को प्रोत्साहन देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के संबंध में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए विभिन्न नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
केजीसीसीआई ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड ने औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य के उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। हालांकि, विषम भौगोलिक परिस्थितियों, बढ़ती उत्पादन एवं परिवहन लागत और पड़ोसी राज्यों से मिल रही प्रतिस्पर्धा के चलते उद्योगों के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे में निवेश का अनुकूल माहौल बनाए रखने और औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए नीतिगत स्तर पर आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।

मंडी शुल्क में छूट और जांच व्यवस्था में सुधार की मांग
चैंबर ने खाद्य प्रसंस्करण, राइस मिलिंग और कृषि आधारित उद्योगों पर मंडी शुल्क के अतिरिक्त बोझ का मुद्दा उठाते हुए औद्योगिक प्रसंस्करण के लिए खरीदे जाने वाले कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क समाप्त करने अथवा शत-प्रतिशत छूट देने की मांग की। संगठन का कहना है कि इस शुल्क के कारण राज्य के उद्योगों की उत्पादन लागत पड़ोसी राज्यों की तुलना में बढ़ जाती है। ज्ञापन में सचल दलों (मोबाइल स्क्वॉड) की जांच व्यवस्था की समीक्षा करने की भी मांग की गई। केजीसीसीआई के अनुसार, सड़कों पर वाहनों की बार-बार भौतिक जांच से माल की आपूर्ति प्रभावित होती है और परिवहन लागत बढ़ती है। सामान्य लिपिकीय या तकनीकी त्रुटियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधारात्मक व्यवस्था अपनाने तथा नियमित जांच प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता जताई गई।
*भूजल शुल्क और औद्योगिक बिजली दरों के युक्तिकरण पर जोर
केजीसीसीआई ने उत्तराखंड में भूजल निकासी शुल्क की दरों को पड़ोसी उत्तर प्रदेश के समान तर्कसंगत बनाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि अधिक शुल्क के कारण विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होती है। साथ ही, जल संरक्षण, जल पुनर्चक्रण और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अपनाने वाली औद्योगिक इकाइयों को शुल्क में विशेष छूट देने का सुझाव दिया गया। औद्योगिक विद्युत दरों का मुद्दा उठाते हुए चैंबर ने कहा कि जल विद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले उत्तराखंड में बिजली की दरें, फिक्स्ड चार्ज और पीक आवर अधिभार ऊर्जा की अधिक खपत करने वाले उद्योगों की लागत बढ़ाते हैं। संगठन ने औद्योगिक बिजली दरों एवं पीक डिमांड शुल्कों की समीक्षा कर पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी और स्थिर टैरिफ व्यवस्था लागू करने की मांग की।

*सड़क-रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने का सुझाव*

औद्योगिक विकास के लिए बेहतर परिवहन सुविधाओं को आवश्यक बताते हुए केजीसीसीआई ने प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने वाली सड़कों के चौड़ीकरण की मांग की। साथ ही, कुमाऊं क्षेत्र में रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता देने और प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों के निकट मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब एवं फ्रेट टर्मिनल स्थापित करने का सुझाव दिया गया।।ज्ञापन में कहा गया कि सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता और रेल माल ढुलाई की पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत बढ़ जाती है। कनेक्टिविटी में सुधार से माल की आवाजाही सुगम होने के साथ उद्योगों की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।
*बीओसीडब्ल्यू एक्ट के तहत सेस की मांगों पर जताई आपत्ति*
चैंबर ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (रोजगार एवं सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम (बीओसीडब्ल्यू एक्ट) के तहत औद्योगिक इकाइयों को जारी किए जा रहे सेस संबंधी नोटिसों का मुद्दा भी उठाया। संगठन के अनुसार, वर्ष 2002 से 2018 की अवधि के संबंध में उद्योगों पर भारी भरकम सेस की मांग करते हुए वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। केजीसीसीआई ने इस कार्रवाई को अनुचित एवं गैरकानूनी बताते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की। संगठन का कहना है कि ऐसी कार्रवाई से उद्योगों में अनिश्चितता और भय का माहौल बन रहा है।

*उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर समयबद्ध निर्णय लेने की मांग*
केजीसीसीआई ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उद्योगों से जुड़े इन मुद्दों पर संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए। साथ ही, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, नए निवेश और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़े विषयों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाए। इस अवसर पर केजीसीसीआई के महासचिव अश्वनी छाबड़ा और पूर्व अध्यक्ष अशोक बंसल उपस्थित रहे।

 

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