तिलक सनातन संस्कृति की पहचान और संस्कारों का प्रतीक: उर्वशी दत्त बाली

खाटू श्याम संकीर्तन महोत्सव में बच्चों को संस्कारों से जोड़ने का आह्वान, महिलाओं की भूमिका पर दिया जोर

 

 

 

 

 

 

 

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। गोपीपुरा की पांडे कॉलोनी में आयोजित बाबा खाटू श्याम जी के पावन संकीर्तन महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उर्वशी दत्त बाली ने बच्चों को सनातन संस्कृति और पारंपरिक संस्कारों से जोड़ने पर जोर देते हुए अभिभावकों से नियमित रूप से बच्चों के माथे पर तिलक लगाने की अपील की। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि तिलक केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की पहचान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वर्दी से सैनिक और चिकित्सक की पहचान होती है, उसी प्रकार माथे पर तिलक सनातनी संस्कृति से जुड़ाव को दर्शाता है। बच्चों को तिलक लगाने से उनमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में मदद मिलती है।

बच्चों में संस्कार और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर
उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि माता-पिता को बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के साथ ही धर्म, संस्कृति और संस्कारों से भी जोड़कर रखना चाहिए। उन्होंने तिलक लगाने की परंपरा को आस्था, एकाग्रता और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक करना परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भगवान को हृदय में बसाने का दिया संदेश
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान को केवल मंदिरों और मूर्तियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने हृदय में स्थान देना चाहिए। सच्ची भक्ति मन की शुद्धता, समर्पण और आस्था में निहित है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ईश्वर पर विश्वास रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तो उसे कठिन परिस्थितियों में भी संबल मिलता है।
परिवार में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
उर्वशी दत्त बाली ने परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक महिला पूरे परिवार को संस्कारों और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने में अहम योगदान दे सकती है। उन्होंने महिलाओं से घर में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि बच्चों को उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर देने के साथ उन्हें धर्म-कर्म से जोड़कर रखना भी जरूरी है।
गांव में धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने, गांव में प्रतिवर्ष बाबा खाटू श्याम जी का दरबार आयोजित करने और घरों में धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस दौरान घरों पर धार्मिक ध्वज लगाने और बच्चों को सनातन परंपराओं के प्रति जागरूक करने की बात भी कही गई। कार्यक्रम का समापन ‘हारे के सहारे की जय’ और ‘खाटू श्याम जी की जय’ के जयकारों के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति और संस्कारों के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।

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