विश्व एनीमिया जागरूकता दिवस 13 फरवरी पर आईएपी उत्तराखंड का आह्वान

“भ्रम तोड़ें, मजबूत रक्त बनाएं, बच्चों का भविष्य सुरक्षित करे

काशीपुर। विश्व एनीमिया जागरूकता दिवस (13 फरवरी) के अवसर पर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) उत्तराखंड ने प्रदेश में बच्चों के बीच बढ़ते एनीमिया के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने समाज में फैली गलत धारणाओं (मिथ्स) को दूर कर वैज्ञानिक तथ्यों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान करते हुए कहा कि एनीमिया, विशेषकर आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया, एक ऐसी स्थिति है जो पूर्णतः रोकथाम योग्य और उपचार योग्य है, फिर भी जागरूकता की कमी और उपचार में अनियमितता के कारण यह गंभीर रूप ले रही है। आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने बताया कि भारत में 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 60–70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि एनीमिया को सामान्य “खून की कमी” समझकर नजरअंदाज करना बेहद खतरनाक है, क्योंकि यह बच्चों की शारीरिक वृद्धि, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क के विकास पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शैशव और प्रारंभिक बाल्यावस्था में आयरन की कमी से बच्चों की सीखने की क्षमता, एकाग्रता, स्मरण शक्ति और स्कूल प्रदर्शन पर असर पड़ता है, जिससे उनका समग्र विकास बाधित हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनीमिया केवल कमजोर या दुबले बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ दिखने वाले बच्चे भी इससे ग्रस्त हो सकते हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर हीमोग्लोबिन परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सहोता ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की पूरी खुराक दिलाएं और हीमोग्लोबिन सामान्य हो जाने पर भी कम से कम 2–3 माह तक आयरन का सेवन जारी रखें, ताकि शरीर में आयरन का भंडार पूरी तरह से भर सके। आईएपी उत्तराखंड ने “एनीमिया मुक्त भारत” जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित स्क्रीनिंग अभियान चलाए जाने चाहिए। साथ ही किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों में एनीमिया की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संगठन ने समाज में फैली प्रमुख भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष बल दिया। आईएपी के अनुसार एनीमिया कोई छोटी समस्या नहीं है, बल्कि यह बच्चे की शारीरिक और मानसिक वृद्धि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यह धारणा भी गलत है कि केवल खान-पान से हर स्तर का एनीमिया ठीक हो जाता है; मध्यम और गंभीर एनीमिया में आयरन सप्लीमेंट अनिवार्य होता है। इसी प्रकार आयरन की दवाइयों को नुकसानदायक समझना भी भ्रांति है, क्योंकि चिकित्सकीय सलाह और सही मात्रा में दी गई आयरन दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और जीवनरक्षक होती हैं। आईएपी ने संतुलित और आयरन युक्त आहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी है। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, राजमा, गुड़, चना, अंकुरित अनाज, अनार और विटामिन C युक्त फल आयरन के अच्छे स्रोत हैं, जो शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में सहायक होते हैं। डॉ. रवि सहोता ने कहा, “एनीमिया के खिलाफ यह लड़ाई केवल चिकित्सकों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। सही जानकारी, समय पर जांच और उचित उपचार से हम अपने बच्चों को स्वस्थ और सशक्त भविष्य दे सकते हैं।” विश्व एनीमिया जागरूकता दिवस के अवसर पर आईएपी उत्तराखंड ने स्पष्ट संदेश दिया कि “आइए, मिलकर भ्रमों को तथ्यों से बदलें और सुनिश्चित करें—मजबूत रक्त, स्वस्थ बच्चे और सशक्त भारत।”

आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने पर दिया विशेष बल 

भ्रम 1: एनीमिया कोई छोटी समस्या है।
सत्य: यह बच्चे की शारीरिक एवं मानसिक वृद्धि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

भ्रम 2: केवल कमजोर या दुबले बच्चे ही एनीमिक होते हैं।
सत्य: स्वस्थ दिखने वाले बच्चे भी एनीमिया से पीड़ित हो सकते हैं।

भ्रम 3: आयरन की दवाइयाँ नुकसानदायक होती हैं।
सत्य: चिकित्सकीय सलाह और सही मात्रा में दी गई आयरन दवाएँ पूरी तरह सुरक्षित और जीवनरक्षक हैं।

भ्रम 4: केवल खान-पान से एनीमिया ठीक हो जाता है।
सत्य: मध्यम और गंभीर एनीमिया में आयरन सप्लीमेंट अनिवार्य होता है।

भ्रम 5: हीमोग्लोबिन सामान्य होते ही आयरन बंद कर देना चाहिए।सत्य: आयरन का सेवन चिकित्सक की सलाह पर कम से कम 2–3 महीने तक जारी रखना जरूरी है, ताकि शरीर में आयरन का भंडार पूरी तरह भर सके।

इंडियन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स उत्तराखंड ने जारी किए एनीमिया जागरूकता पोस्टर

“मजबूत रक्त – मजबूत बच्चे – मजबूत भविष्य” के संकल्प के साथ राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत

काशीपुर। इंडियन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स उत्तराखंड राज्य शाखा (देवभूमि एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स) द्वारा बच्चों एवं किशोरों में एनीमिया की रोकथाम और आयरन सप्लीमेंटेशन के महत्व को रेखांकित करने हेतु विशेष जागरूकता पोस्टरों की श्रृंखला का विधिवत विमोचन किया गया। इस पहल का उद्देश्य एनीमिया के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर वैज्ञानिक, सरल एवं व्यवहारिक जानकारी आमजन तक पहुँचाना है। पोस्टरों का विमोचन राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता एवं सचिव डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एनीमिया को एक गंभीर लेकिन पूरी तरह रोके और ठीक किए जा सकने वाले रोग के रूप में चिन्हित किया। डॉ. रवि सहोता के अनुसार एनीमिया बच्चों और किशोरों में एक प्रमुख जन-स्वास्थ्य समस्या है, जो शारीरिक वृद्धि, बौद्धिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। समय पर पहचान और उचित आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन से इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। इस अभियान के अंतर्गत जारी पोस्टरों में बच्चों एवं किशोरों में एनीमिया की रोकथाम के उपाय, आयरन–फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन का महत्व,आयु-अनुसार सही खुराक की स्पष्ट जानकारी, आयरन थेरेपी से जुड़े आम मिथकों का खंडन, आयरन सेवन से होने वाले सामान्य एवं हल्के दुष्प्रभावों (जैसे मल का काला होना, हल्की पेट की परेशानी) के बारे में सही जानकारी पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि उपचार का पालन बेहतर हो सके। अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने कहा कि एनीमिया के विरुद्ध लड़ाई केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। समुदाय में जागरूकता, भ्रांतियों का निवारण और व्यवहार परिवर्तन इस अभियान की सफलता की आधारशिला हैं। उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञों को निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के अग्रदूत के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। सचिव डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि क्लीनिक, विद्यालय और सामुदायिक मंचों पर एक समान एवं स्पष्ट संदेश पहुँचाना आवश्यक है। इससे एनीमिया की व्यापकता को कम करने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।

राज्यभर में प्रदर्शित होंगे पोस्टर

काशीपुर। आईएपी उत्तराखंड के सचिव डॉ. राकेश कुमार ने बताया अकेडमी द्वारा जारी ये पोस्टर राज्य के बाल रोग क्लीनिकों, अस्पतालों, विद्यालयों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रदर्शित किए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर एनीमिया उन्मूलन के लक्ष्यों के अनुरूप है और उत्तराखंड में निवारक बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आईएपी उत्तराखंड ने दोहराया कि संस्था बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्ध है और “मजबूत रक्त – मजबूत बच्चे – मजबूत भविष्य” के संकल्प के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

 

 

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