सूर्या फाउंडेशन की पहल से ग्रामीण बच्चों को मिला सर्वांगीण विकास का मंच, नवाचार गतिविधियों ने बढ़ाई रचनात्मकता

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। ग्राम ढकिया गुलाबों स्थित लिटिल मॉडल स्कूल में सूर्या फाउंडेशन की आदर्श गांव योजना के अंतर्गत आयोजित 10 दिवसीय ग्रामीण व्यक्तित्व विकास शिविर का समापन समारोह हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय के एमडी संतोष कुमार उपस्थित रहे। उनके साथ सूर्या फाउंडेशन से विकास विश्वकर्मा, विद्यालय की प्रधानाचार्या शिवानी, उत्तराखंड क्षेत्र प्रमुख हिमांशु, स्वरोजगार प्रमुख भरत साह, कंप्यूटर शिक्षिका अमनदीप कौर सहित शिक्षिकाएं सोनम, ईशा, पूजा, रमनदीप, वर्षा, गरिमा और प्रज्ञा भी मौजूद रहीं। मुख्य अतिथि संतोष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के व्यक्तित्व विकास शिविर ग्रामीण अंचल के बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने बच्चों को जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा दी।

अन्य अतिथियों ने भी सूर्या फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। शिविर के दौरान बच्चों को विभिन्न रचनात्मक, शैक्षिक एवं व्यवहारिक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें चित्रकला, मानचित्र परिचय, आर्ट एंड क्राफ्ट, ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसी नवाचार गतिविधियां और इकोब्रिक्स के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण के महत्व को समझाते हुए बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को मजबूती मिली। शिविर के अंत तक प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच और टीमवर्क की भावना में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। बच्चों के व्यवहार, संवाद शैली और अनुशासन में भी सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से नजर आया, जो शिविर की सफलता का प्रमाण बना। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने प्रतिभागी बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा प्रशिक्षकों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। यह शिविर न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रभावी माध्यम बना, बल्कि ग्रामीण समाज में शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा।
