सुप्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सहोता की चेतावनी- बढ़ता स्कूल बैग का वजन बिगाड़ रहा बच्चों का स्वास्थ्य

रीढ़, कंधों और पोस्चर पर पड़ रहा बुरा असर, दिए बचाव के अहम सुझाव

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। प्रतिस्पर्धी शिक्षा व्यवस्था के बीच बच्चों के स्कूल बैग का बढ़ता वजन अब गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए सहोता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक, शिशु रोग विशेषज्ञ एवं आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने बताया कि भारी स्कूल बैग बच्चों की पीठ, कंधों और रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक दबाव डालते हैं, जिससे लंबे समय में शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों, विशेष रूप से अमेरिकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, स्कूल बैग का वजन बच्चे के कुल शरीर वजन का 10 से 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि इसे 10 प्रतिशत के आसपास रखना सबसे सुरक्षित माना जाता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे का वजन 30 किलोग्राम है, तो उसका बैग 3 से 4.5 किलोग्राम के बीच होना चाहिए। इससे अधिक वजन पीठ दर्द, कंधों में खिंचाव, थकान और गलत पोस्चर जैसी समस्याओं को जन्म देता है। डॉ. सहोता ने बैग के डिजाइन, विशेषकर स्ट्रैप्स (कंधे के पट्टों) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्ट्रैप्स कम से कम 5 से 8 सेंटीमीटर चौड़े और गद्देदार होने चाहिए, ताकि वजन समान रूप से कंधों पर वितरित हो सके। पतले या कठोर स्ट्रैप्स बच्चों के कंधों पर दबाव बढ़ाकर दर्द और चोट का कारण बन सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चे हमेशा बैग दोनों कंधों पर पहनें और स्ट्रैप्स को इस तरह समायोजित करें कि बैग पीठ से सटा रहे तथा कमर से नीचे न लटके। एक कंधे पर बैग लटकाने की आदत रीढ़ की हड्डी में टेढ़ेपन का कारण बन सकती है। डॉ. रवि सहोता ने कुछ चेतावनी संकेतों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे बच्चों का आगे झुककर चलना, कंधों पर लाल निशान पड़ना या बार-बार बैग को संभालना। उन्होंने कहा कि ये संकेत बताते हैं कि बैग का वजन या उपयोग सही नहीं है। उन्होंने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से अपील की कि वे बच्चों के बैग का वजन नियमित रूप से जांचें, अनावश्यक किताबें हटाएं और टाइमटेबल के अनुसार ही सामग्री रखने की व्यवस्था करें। स्कूलों में लॉकर सुविधा और वैकल्पिक दिवस (अल्टरनेट डे) बुक सिस्टम अपनाने से भी इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्कूली बैग के लिए बच्चों के वजन का 10 प्रतिशत वाला नियम अपनाएं और बच्चों की रीढ़ को रखें सुरक्षित: डॉ. रवि सहोता

काशीपुर (काशीपुर वार्ता)। इंडियन पीडियाट्रिक्स अकादमी उत्तराखंड के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सहोता ने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधनों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्कूल बैग का वजन उनके शरीर के कुल वजन का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इससे अधिक वजन बच्चों की विकसित होती रीढ़ पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जो आगे चलकर कमर दर्द, झुकाव और अन्य शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है। डॉ. सहोता ने कहा कि बच्चों की रीढ़ अभी विकासशील अवस्था में होती है, इसलिए उस पर अनावश्यक दबाव डालना उनके भविष्य के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे हल्के बैग का चयन करें और केवल आवश्यक किताबें ही बच्चों के बैग में रखें। साथ ही, चौड़े और गद्देदार स्ट्रैप वाले बैग उपयोग में लाएं, जिससे कंधों पर दबाव समान रूप से वितरित हो सके। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से भी आग्रह किया कि वे पाठ्यक्रम और बैग के भार को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास स्वस्थ तरीके से हो सके।

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